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करोड़ों के प्रोजेक्ट्स पर सन्नाटे का साया अमानीगंज पौराणिक म्यूजियम शीशे की (भूल भुलैया) की नाकामी के बीच कल रामायण वैक्स म्यूजियम का उद्घाटन क्या इस बार सिर्फ फीता कटेगा या जनता भी जुटेगी

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अंतरिक्ष तिवारी की कलम से
अयोध्या उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के दूरदर्शी नेतृत्व में पावन नगरी अयोध्या को वैश्विक पटल पर चमकाने के लिए कल सायं 5 बजे काशीराम कॉलोनी के निकट 250 करोड़ से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं की ऐतिहासिक सौगात मिलने जा रही है. रामनगरी के इस अद्भुत कायाकल्प के लिए मुख्यमंत्री जी निश्चित रूप से बधाई के पात्र हैं. लेकिन सबसे बड़ा सवाल स्थानीय प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों की कार्यशैली पर उठता है, जो अपनी लचर प्लानिंग से बेहतरीन प्रोजेक्ट्स को फ्लॉप शो में तब्दील कर देते हैं. इसका जीता-जागता सबूत अमानीगंज जलकल के पास स्थित शीशे की भूलभुलैया है, जहां धरातल पर पड़ताल करने पर एक भी दर्शक नजर नहीं आया. अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर जनता वहां क्यों नहीं जा रही है जबकि इस प्रोजेक्ट का भी कभी खूब धूमधाम से उद्घाटन हुआ था फीता कटा था और प्रशासनिक स्तर पर इसका बड़ा बखान किया गया था करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस पौराणिक थीम आधारित भूलभुलैया के प्रवेश द्वार पर वयस्क के लिए 25 रुपये और स्कूली छात्रों के लिए 15 रुपये की शुल्क तालिका तो टंगी है लेकिन पूरा परिसर सुनसान पड़ा है पर्यटकों की कमी के कारण यह प्रोजेक्ट आर्थिक रूप से वेंटलेटर पर आ चुका है और यहां तैनात कर्मचारियों की सैलरी व बिजली का बिल निकालना भी मुश्किल हो रहा है जब आसपास के स्थानीय लोगों से पूछा गया तो अधिकारियों की कागजी प्लानिंग की हकीकत सामने आ गई. धरातल पर देखने से साफ प्रमाणित होता है कि यहाँ एक बड़े हॉल जितने स्थान पर केवल शीशे लगाकर भूलभुलैया खड़ी कर दी गई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी यहाँ आने वाले वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था करना ही भूल गए पार्किंग स्पेस न होने की वजह से लोग यहाँ आने से कतराते हैं. इसके अलावा परिसर में न तो कोई छोटा पार्क है न बच्चों के लिए झूले हैं और न ही लोगों के विश्राम करने के लिए बैठने की कोई व्यवस्था की गई है यही वजह है कि लोकल अयोध्या वासी भी जो एक बार अपनी फैमिली के साथ यहाँ चले जाते हैं वे दोबारा वहाँ कदम नहीं रखना चाहते.आज का कोई भी परिवार जब बाहर निकलता है तो वह एक कंपलीट पैकेज चाहता है, लेकिन एक पूरे हॉल को सिर्फ शीशों में समेट देने और समय बिताने की समुचित व्यवस्था न होने के कारण लोग यहाँ दोबारा नहीं आ रहे हैं. अब नगर निगम और प्रशासन को कुछ नया सोचना पड़ेगा जिससे यहाँ जनता का वास्तविक ठहराव हो, लोग रुकें और हमारी धार्मिक व सांस्कृतिक पद्धति को समझें जब तक ठहराव के लिए बुनियादी इंतजाम नहीं होते, तब तक जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं होगा. इसी कड़वे अनुभव के बीच कल नगर निगम द्वारा काशीराम कॉलोनी के निकट रामायण वैक्स म्यूजियम और नवनिर्मित जोनल कार्यालय का उद्घाटन होने जा रहा है. मुख्यमंत्री जी हमेशा की तरह अयोध्या को सौगातें देने में आगे हैं, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए रामायण वैक्स म्यूजियम की स्थिति भी अमानीगंज जैसी तो नहीं हो जाएगी इन बड़ी परियोजनाओं की वास्तविक सफलता तब तक संभव नहीं है जब तक नगर निगम केवल उद्घाटन की वाहवाही से आगे बढ़कर व्यवस्थाओं को सचमुच नहीं बदलता और नए केंद्र पर पर्याप्त पार्किंग सुंदर पार्क और बैठने की उत्तम व्यवस्था पहले दिन से ही सुनिश्चित नहीं करता अन्यथा करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यह सिर्फ एक म्यूजियम बनकर ही रह जाएगा और उसे देखने जनता नहीं जाएगी

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