
अंतरिक्ष तिवारी की कलम से भाग-6
अयोध्या। राम मंदिर ट्रस्ट में दानपात्र से नकदी गायब होने और सोने-चांदी के आभूषणों में हेरफेर के कथित आरोपों से आज पूरी दुनिया और वैश्विक मीडिया में अयोध्या चर्चा का विषय बन चुकी है, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं के भरोसे को गहरी ठेस लगी है। इस वैश्विक बदनामी और कथित चोरी को हमेशा के लिए रोकने के लिए मेरी खुद की सोची हुई नई डिजिटल नियमावली को सबसे पहले तुरंत लागू करने की आवश्यकता है। इस नियमावली के तहत मंदिर परिसर से सभी पुरानी पारंपरिक दान पेटियां पूरी तरह हटाकर केवल ऑनलाइन डिजिटल स्कैनर’ की पारदर्शी व्यवस्था की जाए और स्पष्ट लिख दिया जाए कि अब कोई भी नकद दान स्वीकार नहीं होगा। चूंकि मुख्य मंदिर में सुरक्षा कारणों से मोबाइल वर्जित है, इसलिए बाहर लॉकर रूम और निकास द्वारों पर बड़े-बड़े हाईटेक स्कैनर स्क्रीन लगाए जाएं, जहां स्कैन करते ही प्रभु श्री राम की दिव्य छवि दिखाई दे और पैसा सीधे ट्रस्ट के खाते में सुरक्षित चला जाए।
इसके साथ ही भक्तों द्वारा चढ़ाए जाने वाले आभूषणों के लिए विशेष डिजिटल काउंटर हो, जहां तुरंत जांच के बाद कि अर्पित की गई वस्तु सोना है, चांदी है, तांबा है या पीतल, डिजिटल स्कैनर से तत्काल उसकी एंट्री सिस्टम में उपलब्ध करा दी जाए। इसके ठीक बाद भगवान को अर्पित करते ही उस धातु या आभूषण को तुरंत एक ऐसे विशेष हाईटेक लॉकर में डाल दिया जाए जिससे उसे कोई भी बीच में निकाल न सके और यह पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की कड़ी निगरानी में हो। फिर महीने में एक बार जब इस चढ़ावे की गणना करनी हो, तो पहले से सिस्टम में दर्ज डिजिटल डेटा से उस लॉकर से निकले सामान का शत-प्रतिशत सटीक मिलान कर लिया जाए। इससे श्रद्धालुओं और आम जनों के मन में घर कर रहा यह अविश्वास और संशय भी पूरी तरह दूर हो सकेगा कि उनके द्वारा भगवान को भेंट की गई बहुमूल्य वस्तु या राम सेवा के लिए दिया गया दान वास्तव में प्रभु की सेवा में आ रहा है या नहीं। इसी पारदर्शिता के तहत साल में एक बार सरकार की देखरेख में ट्रस्ट का पूरा लेखा-जोखा वैश्विक जनता के सामने प्रमाण सहित प्रस्तुत किया जाना चाहिए, जिसमें कर्मचारियों के वेतन, मंदिर के विकास, भंडारे और चिकित्सा जैसे धर्मार्थ कार्यों में खर्च हुई पाई-पाई का स्पष्ट ब्यौरा हो।
मेरा यह साफ मानना है कि इस कथित प्रकरण की पूरी निष्पक्षता से उच्च स्तरीय जांच होनी ही चाहिए और यदि कोई गलत पाया जाए तो उसे कठोरतम दंड मिलना चाहिए ताकि आगे लोग ऐसा दुस्साहस न करें। लेकिन केवल ट्रस्ट भंग करने या चेहरे बदलने से भ्रष्टाचार रुकने की कोई गारंटी नहीं ले सकता और न ही इससे रामराज्य आएगा। वास्तविक रामराज्य तभी स्थापित हो सकता है जब हमारा अंतर्मन सीधे प्रभु राम से जुड़ जाए और हम हर सेवा को अपना निजी काम नहीं, बल्कि ‘राम काज’ समझकर पूरी पवित्रता से करें। इंसानी नियत को डगमगाने से रोकने के लिए इस डिजिटल नियमावली को राम मंदिर और मथुरा जैसे सभी बड़े देवस्थानों में तुरंत लागू करना अनिवार्य है, तभी कथित आरोपों से मुक्ति मिलेगी और सनातनियों का विश्वास हमेशा के लिए अटूट रहेगा।