
विशेष ग्राउंड रिपोर्ट भाग 4
अंतरिक्ष तिवारी की कलम से
अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे और चंदे से जुड़े कथित वित्तीय हेरफेर के मामले में जांच और सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ती सक्रियता के बीच कई चौंकाने वाले राजनैतिक और प्रशासनिक पहलू सामने आ रहे हैं। इस पूरे प्रकरण में जांच के केंद्र में आए रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के फर्श से अर्श तक के सफर को लेकर अयोध्या के सियासी और सामाजिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार अयोध्या के प्रसिद्ध ऐतिहासिक नागेश्वरनाथ मंदिर के ठीक पीछे कई भाइयों के हिस्से वाले एक बेहद तंग और संकरे पैतृक मकान में रहने वाले टिन्नू यादव शुरुआती दिनों में भारी आर्थिक तंगी के बीच ऑटो चलाते थे लेकिन उनके भीतर अपने सामाजिक और आर्थिक रसूख को बड़ा करने की तीव्र महत्वाकांक्षा पल रही थी।
इस विशेष रिपोर्ट में टिन्नू यादव के नागेश्वरनाथ मंदिर के पीछे स्थित उसी पुराने पैतृक मकान के साथ-साथ उनके नए आलीशान आवास की तस्वीरें भी साझा की जा रही हैं, जो उनके बदलते रसूख की कहानी खुद बयां करती हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि शुरुआती दिनों में एक बेहद साधारण और महज एक ड्राइवर की नौकरी करने वाले शख्स के पास आखिर इतनी अकूत संपत्ति कहाँ से आई उनके जीवन में अचानक आया यह हैरान करने वाला और अकल्पनीय बदलाव क्या वाकई सामान्य है यह एक ऐसा गंभीर विषय है जिसे अब देश की शीर्ष जांच एजेंसियों शासन-प्रशासन और खुद जनता के विवेक पर छोड़ा जा रहा है कि वे स्वयं तय करें कि इस फर्श से अर्श तक के सफर की असली हकीकत क्या है।खोजी सूत्रों का दावा है कि यह तो महज शुरुआत है; ऐसी कई और भी बेनामी संपत्तियां हैं जिन्हें इस विशेष पड़ताल के जरिए लगातार खंगालने का प्रयास किया जा रहा है और इनके पुख्ता रिकॉर्ड निकाले जा रहे हैं। इन संपत्तियों को लेकर विभिन्न सरकारी और सुरक्षा एजेंसियां भी पूरी मुस्तैदी के साथ एक-एक इनपुट पर काम कर रही हैं।इलाके में आरोपी के कथित प्रभाव के कारण एक अजीब सा डर भी है, जिसकी वजह से कई पुराने लोग ऑन-कैमरा कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। लेकिन ग्राउंड जीरो पर जब आम लोगों की तरह बेहद साधारण बनकर सहजता से बातचीत की गई, तो पुराने लोगों ने खुलकर बात की। उनका साफ मानना है कि इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए साल 1990 से लेकर सन 2000 के बीच के उस पूरे दशक के इतिहास को खंगालना बेहद जरूरी है, क्योंकि इस नेटवर्क की असली कड़ियां वहीं छिपी हैं।इन चर्चाओं में टिन्नू यादव का पुराना वैचारिक और राजनैतिक बैकग्राउंड सबसे बड़ा विषय बना हुआ है। सूत्रों और पुराने स्थानीय लोगों का दावा है कि साल 1990 के उस दौर में, जब अयोध्या में कारसेवकों पर हुए प्रसिद्ध गोलीकांड को लेकर समाजवादी पार्टी के संरक्षक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव चौतरफा आरोपों और विवादों के केंद्र में घिरे हुए थे उस बेहद संवेदनशील और उथल-पुथल भरे समय में भी टिन्नू यादव राजनैतिक रूप से पूरी तरह से सपा को समर्पित थे और उन्हीं की नीतियों में अटूट आस्था जताते थे। पुराने लोग बताते हैं कि जिस राजनैतिक बैकग्राउंड और विचारधारा पर अयोध्या में गोली चलवाने के सबसे गंभीर आरोप लगे, उससे लंबे समय तक जुड़े रहने के बाद अचानक टिन्नू यादव का पूरी तरह बदल जाना लोगों को हैरान करता है।स्थानीय विश्लेषकों के अनुसार, समय के साथ जब टिन्नू को लगा कि उस पुराने राजनैतिक ढांचे में एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में उनका कोई बड़ा वजूद नहीं बन पा रही है, तब उन्होंने रणनीतिक रूप से अपनी दिशा बदलने का प्रयास शुरू किया। मूल रूप से ऑटो चालक होने के कारण, वे राम मंदिर आने वाले यात्रियों को घुमाते थे उन्हें मंदिर का महत्व बताते थे और दर्शन के लिए ले जाते थे। इसी दौरान धीरे-धीरे संतो के बीच पहचान बनी सूत्र बताते हैं कि एक अयोध्या के पूज्य संत का भी ड्राइवर रह चुका हैं कारसेवकपुरम में भी उनकी एक पहचान वहां पर आने-जाने वाले हिंदूवादी नेताओं एवं विश्व हिंदू परिषद के लोगों से संपर्क बनने लगा था फिर सीधे ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के संपर्क में आ गए और उनके निजी ड्राइवर बन गए। इसके बाद वे धीरे-धीरे उनके इतने करीबी और विश्वासपात्र बन गए कि मंदिर की हर छोटी-बड़ी व्यवस्था की पूरी जानकारी सीधे उन तक रहने लगी।साल 2020 में राम मंदिर ट्रस्ट के गठन के बाद अगले 6 वर्षों के भीतर टिन्नू यादव ने साधारण ड्राइवर से लेकर ट्रस्ट के कोर-ग्रुप तक अपनी ऐसी मजबूत पैठ बना ली कि वे अयोध्या के सूखदारों की सूची में शामिल हो गए। लेकिन जैसे ही दानपात्र से धन सोने-चांदी के चढ़ावे में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर हेरफेर का यह संवेदनशील मामला सामने आया वैसे ही इस कथित साम्राज्य की परतें एक-एक कर खुलनी शुरू हो गई हैं। खोजी सूत्रों की मानें तो जांच एजेंसियां इस पूरे खेल को महज कुछ करोड़ का नहीं, बल्कि कई सौ करोड़ रुपये के कथित वित्तीय हेरफेर के एंगल से देख रही हैं। स्थानीय लोग और सूत्र दबी जुबान में यह भी बात कर रहे हैं कि इस कथित नेटवर्क के पीछे केवल टिन्नू यादव अकेले नहीं हैं बल्कि इसके पीछे कुछ और मास्टरमाइंड भी पर्दे के पीछे रहकर काम कर रहे हो सकते हैं, जिनकी पैठ व्यवस्था में ऊपर तक है।इस संवेदनशील घटनाक्रम को देखते हुए अब जनता और रामभक्तों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। देश भर के श्रद्धालु अब यह मांग उठा रहे हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्षता और कड़ाई से जांच के लिए इसे तुरंत ईडी और सीबीआई जैसी देश की सर्वोच्च स्वतंत्र जांच एजेंसियों को सौंपा जाना चाहिए। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भी लोग मांग कर रहे हैं कि सच पूरी तरह से सामने लाने और दूध का दूध व पानी का पानी करने के लिए इसमें शामिल मुख्य संदिग्धों का बकायदा नार्को टेस्ट कराया जाना चाहिए।राहत की बात यह है कि यह पूरा संवेदनशील घटनाक्रम अब पूरी तरह से केंद्र एवं राज्य सरकार की सीधी और पैनी निगाह में आ चुका है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी जो हमेशा प्रभु श्री राम के दर्शन करने खुद अयोध्या आते रहते हैं और यहाँ की व्यवस्थाओं की व्यक्तिगत निगरानी करते हैं वे इस मामले पर शुरू से बेहद गंभीर हैं। वहीं, देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी भी खुद कई बार अयोध्या की पावन धरती पर आ चुके हैं और इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। शीर्ष नेतृत्व की इस सीधी सक्रियता के कारण ही आज जनता और रामभक्तों की उम्मीदें बहुत बड़ी हो चुकी हैं। जन-आकांक्षाओं की इसी कसौटी पर खरा उतरने के लिए तमाम सुरक्षा और जांच एजेंसियां पूरी शिद्दत के साथ दिन-रात काम कर रही हैं। एजेंसियां बेहद सतर्कता के साथ ग्राउंड से लेकर तकनीकी स्तर तक इस मामले से जुड़े एक-एक गोपनीय इनपुट को खंगालकर बाहर निकाल रही हैं। अंदरखाने से मिल रही खबरों के अनुसार केंद्र और राज्य सरकार दोनों की सख्त निगरानी के बीच सत्ताधारी दल ने भी यह स्पष्ट निर्णय ले लिया है कि इस पावन धाम की साख से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और आने वाले दिनों में कुछ बहुत बड़ी कानूनी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।यह रिपोर्ट विशुद्ध रूप से स्थानीय सूत्रों जनचर्चाओं और पुराने लोगों से बातचीत के आधार पर तैयार की गई है। इस मामले में कोई भी अंतिम फैसला जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड और माननीय कोर्ट के आदेशों के अधीन होता है। एक खोजी पत्रकार के रूप में हमारा प्रयास सिर्फ लोगों के बीच चल रहे माहौल चर्चाओं और सच्चाई को शासन-प्रशासन और जनता के समक्ष पूरी निष्पक्षता से परोसना है। लोग जो बातें कह रहे हैं उन्हें ही बिना किसी पूर्वाग्रह के आप तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है ताकि वस्तुस्थिति सामने आ सके।बहरहाल आज टिन्नू यादव और उनके कुछ करीबियों के साथ-साथ इस खेल से जुड़े अन्य संदिग्ध चेहरों के नाम पर दर्जनों करोड़ की कथित बेनामी संपत्तियों जमीनों आलीशान मकानों और एक बड़े निर्माणाधीन होटल की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। विशेष जांच दल की जांच अब केवल चंदे की रसीदों या बैंक खातों तक सीमित नहीं है, बल्कि भव्य प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के बाद उमड़ी विराट भीड़ के दौरान मिले गुप्त दान पर भी टिक गई है। जनवरी 2024 के बाद देश से आए अमीर भक्तों ने भारी मात्रा में जो सोना, चांदी और नकदी गुप्त रूप से बिना किसी पुख्ता रिकॉर्ड के अर्पित की थी सूत्रों के अनुसार एजेंसियां उसमें भी हुए कथित हेरफेर के रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। वरिष्ठ विश्लेषकों का साफ मानना है कि यदि इस कथित वित्तीय चक्रव्यूह का असली सच जनता के सामने लाना है तो टिन्नू यादव और उनके सहयोगियों के साल 1990 से लेकर सन 2000 के बीच के उस इतिहास और पुराने कनेक्शंस को भी पूरी तरह खंगालना होगा। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी और सक्रिय सुरक्षा एजेंसियां इन सभी गंभीर वित्तीय और तीखे बिंदुओं पर कड़ाई से तफ्तीश कर रही हैं, जिससे जल्द ही बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।ग्राउंड रिपोर्ट के अगले भाग 5 में देखिए ट्रस्ट के भीतर मौजूद एक और रसूखदार शख्स की पूरी इनसाइड स्टोरी