अयोध्या: पौराणिक निर्मली कुंड के अस्तित्व पर मंडराया संकट बजट के दुरुपयोग पर साधु-संतों ने दी जल समाधि की चेतावनी
अयोध्या। अयोध्या के छावनी क्षेत्र में स्थित प्राचीन एवं पौराणिक निर्मली कुंड और यहाँ का श्री राम जानकी मंदिर आज घोर उपेक्षा का शिकार हैं। यह पौराणिक स्थल छावनी क्षेत्र में स्थित है, जहाँ 14 कोसी परिक्रमा मार्ग व गुप्तार घाट के विकास कार्य चल रहे हैं। महंत अशोक दास (चेला श्याम सुंदर दास) जो कि स्वयं इसी स्थल पर निवास करते हैं, ने गंभीर आरोप लगाया है कि निर्मली कुंड के सौंदर्यीकरण के लिए जो बजट आया था वह पैसा कहीं दूसरी जगह खर्च कर दिया गया, जो कि संपूर्ण सनातन प्रेमियों की आस्था के साथ खिलवाड़ है। महंत ने बताया कि उन्हें समाचार पत्रों के माध्यम से जानकारी हुई थी कि अयोध्या के कुंडों का विकास कार्य प्रगति पर है, परंतु वे स्वयं इस स्थल पर रहते हैं और उन्होंने देखा कि वहां एक ईंट तक नहीं रखी गई थी और कोई भी विकास कार्य नहीं कराया गया था। इसके बाद जब उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात की, तो उन्होंने स्वीकार किया कि निर्मली कुंड के लिए कार्य प्रस्तावित था, परंतु वहां का बजट कहीं और लगा दिया गया है।महंत अशोक दास ने इस मुद्दे को लेकर राज्य के पर्यटन मंत्री, मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी से शिकायत की है लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। महंत का कहना है कि 14 कोसी सड़क व गुप्तार घाट का निर्माण कार्य निश्चित रूप से होना चाहिए और इसे बढ़ाया जाना चाहिए, परंतु इसके साथ ही यह भी अनिवार्य है कि जो निर्मली कुंड की पौराणिक धरोहर प्रस्तावित थी, उसे बचाया जाए और उसका जीर्णोद्धार भी शीघ्र कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं और निर्मली कुंड का अस्तित्व समाप्त हुआ, तो जिस प्रकार भगवान श्री राम ने गुप्तार घाट पर जल समाधि ली थी, उसी प्रकार साधु-संत भी जल समाधि लेने को मजबूर होंगे, क्योंकि राम काज के लिए समर्पित संतों के लिए इस ऐतिहासिक और पौराणिक धरोहर के बिना जीवन का कोई औचित्य नहीं है। महंत ने मुख्यमंत्री से पुनः भावुक अपील की है कि वे इस मामले का संज्ञान लें, बजट के दुरुपयोग की जांच कराएं और छावनी क्षेत्र स्थित इस लोक आस्था के केंद्र का जीर्णोद्धार कार्य शीघ्र सुनिश्चित कराएं।