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लाइसेंस के नाम पर हर साल ₹1 लाख की डिमांड और धोखाधड़ी का आरोप पीड़ित ने आयुक्त से की शिकायत तो सहायक आयुक्त मानिक चंद्र सिंह ने दस्तावेजों के साथ आरोपों को बताया निराधार


अयोध्या। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग में तैनात सहायक आयुक्त खाद्य मानिक चंद्र सिंह पर एक व्यापारी द्वारा भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। व्यापारी का सीधा आरोप है कि उससे लाइसेंस के नाम पर साल दर साल अवैध धन की वसूली की गई और विरोध करने पर विभाग ने हेराफेरी कर उसका लाइसेंस ही किसी दूसरे के नाम हस्तांतरित कर दिया। पीड़ित सैयद सदरुद्दीन ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत आयुक्त के समक्ष दर्ज कराई है। पीड़ित व्यापारी का आरोप है कि वर्ष 2023 से लाइसेंस प्रक्रिया के नाम पर उनसे लगातार एक लाख रुपये की डिमांड की जाती रही। फरवरी 2026 में उन्हें ‘अल नूर फ्रेश फूड’ का लाइसेंस मिला, लेकिन आरोप है कि कुछ ही समय बाद उनकी आईडी और पासवर्ड बदलकर वही लाइसेंस किसी दूसरे व्यक्ति को थमा दिया गया। व्यापारी का दावा है कि जब उन्होंने कार्यालय जाकर पूछताछ की, तो उन्हें नया लाइसेंस बनाने के एवज में ढाई लाख रुपये की और मांग की गई। इसी प्रताड़ना से तंग आकर पीड़ित ने आयुक्त का दरवाजा खटखटाया है।इन सनसनीखेज आरोपों पर पलटवार करते हुए सहायक आयुक्त खाद्य मानिक चंद्र सिंह ने विभागीय दस्तावेजों और ठोस साक्ष्यों के साथ अपना पक्ष रखा है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता पहले पार्टनरशिप में कार्य कर रहा था और पूर्व में लेनदेन को लेकर इनका आपसी समझौता हुआ था। सहायक आयुक्त खाद्य मानिक चंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री जी की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हवाला देते हुए संदेश दिया कि उनका विभाग भ्रष्टाचार मुक्त शासन के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति अकेला लाइसेंस धारक होता है और गलत पाया जाता है, तो उसका लाइसेंस तत्काल रद्द किया जा सकता है, लेकिन पार्टनरशिप में चल रहे कार्यों में नियम अलग होते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि पार्टनरशिप में एक पक्ष की गलती या विवाद के कारण दूसरे निर्दोष पार्टनर को सजा नहीं दी जा सकती और न ही उसका हक छीना जा सकता है। इसी नियमावली के तहत विभाग ने निष्पक्ष कार्रवाई की है।
अधिकारी ने यह भी बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जब आयुक्त कार्यालय में पक्ष रखने का समय आया, तो विभाग की ओर से वे स्वयं साक्ष्यों के साथ मौजूद रहे, लेकिन शिकायतकर्ता सैयद सदरुद्दीन अपना पक्ष रखने के लिए आयुक्त के सामने पेश ही नहीं हुआ। मानिक चंद्र सिंह ने उन पर लगे लाखों रुपये की मांग के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि विभाग की पूरी प्रणाली डिजिटल है, जिसमें किसी भी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाइसेंस में जो भी संशोधन किए गए वे प्राप्त ऑनलाइन आवेदनों और विधिक दस्तावेजों के आधार पर नियमानुसार किए गए हैं।

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