पत्रकार अंतरिक्ष तिवारी की कलम से
अयोध्या धाम के पावन तीर्थ क्षेत्र पुरम में जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपने गौरवशाली 100 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया, तो पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति और अनुशासन के अनूठे संगम से सराबोर था। यह अवसर केवल एक संगठन की वर्षगांठ नहीं, बल्कि एक शताब्दी के उस अखंड तप और समर्पण का उत्सव था, जिसे डॉ. हेडगेवार ने रोपा और आज यह वटवृक्ष पूरी दुनिया को सेवा और राष्ट्रवाद की दिशा दे रहा है। संघ की इस 100 साल की यात्रा में उन लाखों अज्ञात स्वयंसेवकों के त्याग की महक है, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण के लिए अपने सुखों की आहुति दे दी और समाज को जागृत करने का बीड़ा उठाया। आज जब संघ के प्रशिक्षित स्वयंसेवक देश के सर्वोच्च पदों पर बैठकर ‘राष्ट्र प्रथम’ के मंत्र को साकार कर रहे हैं, तब अयोध्या में आयोजित इस भव्य कवि सम्मेलन का उद्देश्य इसी गौरवशाली गाथा को जन-जन तक पहुँचाना था। कार्यक्रम की गरिमा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंच पर जिले के माननीय विधायक स्थानीय एमएलसी पूर्व सांसद और आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी व निष्ठावान कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे। लेकिन इसी भव्यता और अनुशासित उपस्थिति के बीच एक ऐसा दृश्य कैमरे में कैद हुआ, जिसने संघ की कठोर नियमावली और अनुशासन के दावों के बीच एक अलग ही कहानी बयां कर दी।हैरानी की बात यह रही कि कार्यक्रम अभी अपनी शुरुआती स्थिति में ही था, जब रुदौली विधायक रामचंद्र यादव जी गहरी नींद के आगोश में समाए हुए थे। शाम 4:00 बजे से निर्धारित इस कार्यक्रम को शुरू हुए अभी ज्यादा समय नहीं बीता था और घड़ी में 5:00 से 6:00 के बीच का समय हो रहा था तभी विधायक जी के इस ‘दिव्य निद्रासन’ का नजारा कैमरे में कैद हो गया। जहाँ मंच पर कवि साहब चक्रव्यूह भेदने वाले वीर अभिमन्यु की शौर्य गाथा सुना रहे थे और ओज की ज्वाला धधक रही थी वहीं विधायक जी थकान के आगे पूरी तरह सरेंडर कर चुके थे। कैमरे की नजरों ने विधायक जी को इस ‘सहज अवस्था में कैद किया कि अब सोशल मीडिया पर उनके वीडियो की बाढ़ आ गई है और लोग पूछ रहे हैं कि क्या विधायक जी ने संघ के “पंच परिवर्तन” में ‘छठा परिवर्तन गहरी नींद को मान लिया है।जहाँ एक आम स्वयंसेवक और मंच पर आसीन अन्य सभी वरिष्ठ पदाधिकारी घंटों से वीर अभिमन्यु के पराक्रम और संगठन के विचारों को आत्मसात करने की पूरी गंभीरता दिखा रहे थे, वहीं विधायक जी को नींद की ऐसी पवित्र झपकी आई कि वे अभिमन्यु की शौर्य गाथा की हुंकार से भी बेखबर होकर सपनों के किसी ‘अलग लोक की सैर पर निकल गए।जनता अब तीखे बाण छोड़ते हुए सवाल पूछ रही है कि नेता जी क्या वीर अभिमन्यु की गाथा आपके कानों में मधुर लोरी बनकर उतर रही थी या आप खुद को संघ के अनुशासन से ऊपर मान बैठे हैं। अनुशासन की वह पाठशाला जहाँ स्वयंसेवकों ने राष्ट्र के लिए अपना पूरा जीवन गला दिया, वहाँ विधायक जी का यह ‘सोता हुआ चेहरा कई सवाल खड़े कर रहा है। लोग कह रहे हैं कि जहाँ एक तरफ संगठन अपने 100 साल के संघर्षों का गुणगान कर रहा है, वहीं माननीय विधायक जी उस गौरवशाली इतिहास के बीच विश्राम की मुद्रा में थे। सवाल बड़ा तीखा है—अगर क्षेत्र की भागदौड़ से थकान इतनी ही ज्यादा थी कि कार्यक्रम शुरू होने के कुछ ही समय के भीतर आपकी आँखें नहीं खुल पा रही थीं तो फिर मंच पर बैठकर संगठन के इतने महत्वपूर्ण उत्सव के बीच इस तरह की लापरवाही की क्या मजबूरी थी। अब आलम यह है कि लोग कविताएं तो भूल गए लेकिन विधायक जी का यह अंदाज़ हर मोबाइल स्क्रीन पर वायरल हो रहा है, जिसने उत्सव की पूरी गंभीरता को एक ज़ोरदार झपकी के साथ तंज और मज़ाक की चर्चाओं में बदल दिया है।