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निर्मला और सोना हॉस्पिटल पर कार्रवाई के सवाल पर चुप्पी अयोध्या सीएमओ बोले अभी जवाब नहीं दूंगा पहले मुझे एक्शन लेने दो

अंतरिक्ष तिवारी की कलम से

अयोध्या में स्वास्थ्य विभाग की साख और अवैध अस्पतालों के खिलाफ चल रही जंग अब बयानों और टालमटोल के दिलचस्प मोड़ पर आ गई है। जिले के चर्चित ‘निर्मला हॉस्पिटल और ‘सोना हॉस्पिटल’ को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. सुशील कुमार बानियान ने 72 घंटे के भीतर बड़े एक्शन का दावा किया था लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद जब मीडिया ने उनसे जवाब मांगा तो सीएमओ साहब कैमरे से बचते नजर आए। उन्होंने दो टूक कहा “अभी मैं कोई जवाब नहीं दूंगा पहले मुझे कार्रवाई करने दो। उनकी यह चुप्पी और “जल्द” कार्रवाई का आश्वासन कई सवाल खड़े कर रहा है, खासकर तब जब हाल ही में साकेतपुरी स्थित निर्मला हॉस्पिटल में एक महिला की मौत के मामले ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। कनीगंज निवासी सुनील कौशल की माता सरोज की इलाज के दौरान हुई संदिग्ध मौत ने विभाग की कार्यशैली पर गंभीर धब्बा लगा दिया है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने डिस्चार्ज से ठीक पहले इंजेक्शन का ओवरडोज दे दिया, जिससे मरीज की जान चली गई। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि अस्पताल के बेसमेंट में अवैध रूप से आईसीयू संचालित हो रहा था और मौके पर कोई योग्य डॉक्टर तक मौजूद नहीं था। इस घटना से उपजे भारी जन-आक्रोश के बीच सीएमओ खुद के ट्रोल होने और आलोचना झेलने का दर्द तो बयां कर रहे हैं लेकिन ठोस कार्रवाई अब भी फाइलों में अटकी दिख रही है।
विभागीय सुस्ती और टालमटोल के बीच अब शासन स्तर से बड़ी हलचल शुरू हो गई है। रुदौली विधायक की शिकायत पर प्रशासन ने ‘रैपिड एक्शन
लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के दो लिपिकों, विजय कुमार और योगेंद्र तिवारी समेत तीन कर्मियों को लखनऊ तलब किया है। विधायक ने शासन को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए हैं कि सीएमओ द्वारा सील किए गए करीब 70-75 अस्पतालों को इन लिपिकों ने मोटी रकम लेकर पिछले दरवाजे से दोबारा संचालित करने की अनुमति दे दी। इस बड़े भ्रष्टाचार के खुलासे ने अयोध्या से लेकर लखनऊ तक स्वास्थ्य विभाग में खलबली मचा दी है। निदेशक पैरामेडिकल डॉ. रंजना खरे ने सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी आरोपी कर्मचारी मूल फाइलों और पंजीकरण दस्तावेजों के साथ लखनऊ कार्यालय में उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराएं। शासन ने दो टूक चेतावनी दी है कि जांच में किसी भी तरह की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और इसमें होने वाली देरी का पूरा उत्तरदायित्व स्वयं सीएमओ का होगा। अब देखना यह है कि लखनऊ की इस सख्ती और मृतका के परिजनों के आंसुओं के बाद क्या निर्मला और सोना हॉस्पिटल जैसे रसूखदार संस्थानों पर प्रशासन का हंटर चलेगा या फिर भ्रष्टाचार की यह चादर एक बार फिर सच को ढक लेगी।

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