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चंपत राय ने बताया 1934 का वो इतिहास। जब घोड़ों पर सवार होकर माताओं-बहनों ने संभाला था मोर्चा अब बनेगा भव्य स्मारक

अंतरिक्ष तिवारी की विशेष रिपोर्ट आज धर्मनगरी अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रखर नायक पूज्य डॉ. राम विलास दास वेदांती जी महाराज की पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर हनुमानगढ़ी के संतों, विभिन्न अखाड़ों के महंतों और बड़ी संख्या में राम भक्तों का संगम हुआ। कार्यक्रम में विशेष रूप से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र भी उपस्थित रहे। महाराज जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते समय सभी की आँखें नम हो गईं; संतों और भक्तों ने रुंधे गले से उन्हें नमन किया।मीडिया से बातचीत में चंपत राय जी ने वेदांती जी के गौरवशाली संघर्ष को याद करते हुए बताया कि वे वर्ष 1984 से ही राम मंदिर आंदोलन के मुख्य स्तंभ रहे। उन्होंने बताया कि महाराज जी का अंतिम समय भी मंगलमय था; वे रीवा में रामकथा कह रहे थे और राम धुन गाते हुए ही उन्होंने परमधाम की प्राप्ति की।इस दौरान मीडिया ने एक महत्वपूर्ण सवाल किया कि,वेदांती जी और ऐसे अनगिनत संतों व महापुरुषों का राम मंदिर के लिए 500 वर्षों का बड़ा योगदान रहा है, तो क्या उनकी याद में मंदिर परिसर में कुछ ऐसा ऐतिहासिक बनाया जाएगा जिससे आने वाले श्रद्धालु और सनातन प्रेमी उनके संघर्षों के बारे में जान सकेंइस पर चंपत राय जी ने बहुत ही मार्मिक जवाब दिया। उन्होंने कहा, आप यह भविष्य की बात पूछ रहे हैं, लेकिन वर्तमान में हमारा सारा ध्यान और पूरी ऊर्जा मंदिर निर्माण के कार्यों को पूर्ण करने में लगी हुई है।उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि राम मंदिर की यह विजय किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज के 500 वर्षों के संघर्ष का परिणाम है।चंपत राय जी ने विशेष रूप से महिलाओं के शौर्य को रेखांकित करते हुए बताया कि 1934 के संघर्ष के दौरान माताओं और बहनों ने घोड़ों पर सवार होकर धर्म की रक्षा के लिए युद्ध लड़ा था और अपनी गर्दन तक कटा दी थी। उन्होंने कहा कि किसी एक का नाम लेना या किसी को छोड़ देना उचित नहीं होगा, क्योंकि हर बलिदान का अपना महत्व है। उन्होंने घोषणा की कि यद्यपि अभी प्राथमिकता मंदिर निर्माण है, लेकिन भविष्य में ट्रस्ट उन सभी पवित्र आत्माओं, संतों और घोड़ों पर सवार होकर पराक्रम दिखाने वाली वीरांगनाओं के सम्मान में एक भव्य स्मारक बनाने पर विचार कर रहा है। यह स्मारक आने वाले श्रद्धालुओं को उन गुमनाम नायकों की गाथा बताएगा जिनके बलिदान से आज भव्य मंदिर का सपना साकार हुआ है।

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