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सत्य के साधकों का सम्मान और व्यवस्था के दीमकों को खुली चुनौती

सत्य के साधकों का सम्मान और व्यवस्था के दीमकों को खुली चुनौती============
पत्रकार अंतरिक्ष तिवारी की कलम से =========================भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक गर्जना:
चुनौतियों से टकराना और सत्य के मार्ग पर अडिग रहना ही मेरा स्वभाव है। पद की गरिमा चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, न्याय की लड़ाई में मैं अंतिम सांस तक पीछे नहीं हटूंगा। ईश्वर और सत्य के अतिरिक्त मेरा मस्तक कहीं और नहीं झुक सकता। जब मैं संघर्ष के मैदान में उतरता हूँ, तो स्वयं को शून्य मानकर सर्वस्व दांव पर लगा देता हूँ, क्योंकि हार-जीत से बड़ा मेरा सिद्धांतों पर टिके रहना है। हर परिस्थिति को मुस्कुराहट के साथ स्वीकार करना ही मेरी शक्ति है।मेरा यह संदेश कुछ उन भ्रष्ट नेताओं कुछ भ्रष्ट अधिकारियों, कुछ भ्रष्ट पूंजीपतियों, और भू-खनन माफियाओं के लिए है जिन्होंने इस व्यवस्था को अपनी जागीर समझ रखा हैतुम एक बार टकरा कर देख लेना, तुम्हें भी पता चलेगा कि तुम्हारा पाला एक ऐसे ‘पागल’ से पड़ा है जो सत्य के लिए मौत को भी अपना उपहार मानता है। तुम्हारा सिस्टम, तुम्हारे मुकदमे और तुम्हारी धमकियाँ मेरा कुछ नहीं छीन सकतीं, क्योंकि जो शून्य हो चुका हो उसे खोने का भय नहीं होता। वहीं दूसरी ओर, मेरा शीश उन ईमानदार व्यक्तित्वों के चरणों में सादर नत है जो आज भी ईमानदारी की मशाल जलाए हुए हैं। जो शोषितों वंचितों और पीड़ितों की सेवा को अपना धर्म मानते हैं, उन सच्चे नायकों का मैं दिल से सम्मान करता हूँ। सत्य की इस जंग में मैं झुकूँगा नहीं बस ईश्वर से यही प्रार्थना है कि जब मौत भी आए तो वह मेरी मुस्कुराहट के सामने हार जाए।

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