पत्रकार अंतरिक्ष तिवारी की विशेष रिपोर्ट
राम नगरी अयोध्या जहाँ एक ओर भव्यता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है, वहीं दूसरी ओर यहाँ की स्वास्थ्य सेवाओं की आड़ में नियमों और मानकों की धज्जियां उड़ाने वाला एक ऐसा काला सच पनप रहा है जो किसी भी दिन बड़ी त्रासदी का कारण बन सकता है। एक विशेष पड़ताल और विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी ने यह साफ कर दिया है कि अयोध्या के कई रिहायशी इलाकों में ‘मौत का व्यापार’ फल-फूल रहा है। सबसे डरावना मंजर यह है कि शहर की संकरी गलियों और आवासीय भूखंडों पर बिना किसी कानूनी अनुमति के व्यावसायिक अस्पताल धड़ल्ले से चलाए जा रहे हैं। यह न केवल प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि उन बेगुनाह मरीजों की जिंदगी के साथ किया जा रहा एक क्रूर खिलवाड़ भी है।
नियमों की बात करें तो राष्ट्रीय भवन संहिता और स्वास्थ्य विभाग के मानक स्पष्ट रूप से यह आदेश देते हैं कि किसी भी अस्पताल के सामने की सड़क कम से कम तीस से चालीस फीट चौड़ी होनी चाहिए। लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है; यहाँ महज दस से पंद्रह फीट की तंग गलियों में बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर बहु-विशेषज्ञ अस्पताल खोल दिए गए हैं। इन आवासीय ढांचों में न तो रोगी वाहन के मुड़ने की जगह है और न ही अग्निशमन यानी आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम। बिना भूमि उपयोग परिवर्तन’ कराए और बिना व्यावसायिक नक्शा पास कराए इन घरों में गहन चिकित्सा इकाई और ऑपरेशन कक्ष संचालित करना किसी ‘मौत के जाल’ से कम नहीं है। स्थानीय जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि आखिर किसकी शह पर ये अवैध अस्पताल आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक रोटियां सेंक रहे हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि इन अस्पतालों में जैविक चिकित्सा कचरे के निस्तारण से लेकर वाहन पार्किंग तक के मानकों की भारी अनदेखी की जा रही है। आवासीय क्षेत्रों में इन अवैध गतिविधियों के कारण आम नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है। अब समय आ गया है कि स्वास्थ्य विभाग, विकास प्राधिकरण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड केवल कागजों पर खानापूर्ति बंद करें और इन निजी अस्पतालों पर अचानक छापेमारी करें। जब तक लापरवाही बरतने वाले इन अस्पतालों को सील नहीं किया जाएगा और इनके संचालकों पर कड़ा जुर्माना नहीं लगेगा, तब तक मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकती।लापरवाही का यह आलम उन ईमानदार चिकित्सा संस्थानों की छवि को भी नुकसान पहुँचा रहा है जो सभी मानकों का पालन कर रहे हैं। अयोध्या की सजग जनता अब चुप बैठने वाली नहीं है; प्रशासन से पुरजोर मांग की जा रही है कि अवैध रूप से चल रहे इन अस्पतालों के खिलाफ एक व्यापक सफाई अभियान चलाया जाए। यह स्पष्ट चेतावनी है कि जो अस्पताल आवासीय भूखंडों पर अपनी अवैध दुकानें चला रहे हैं उनका पर्दाफाश जल्द ही सार्वजनिक रूप से किया जाएगा। चिकित्सा जैसा पवित्र पेशा मुनाफाखोरी की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले इन सौदागरों को अब कानून के दायरे में आना ही होगा क्योंकि यह लड़ाई हर उस मासूम की जान बचाने की है जो इन मानकों की कमी के कारण खतरे में है।