2027 के सियासी रण में पत्रकारों की यात्राएं: पूर्व सांसद पर लगे भ्रामक आरोपों का सच और विधायक के दौरे की जमीनी हकीकत
अंतरिक्ष तिवारी की कलम से। ==========================================राम की पावन नगरी अयोध्या में इस समय पत्रकारों की धार्मिक यात्राओं को लेकर राजनीतिक हलचल बहुत बढ़ गई है। इसमें पूर्व सांसद और अयोध्या के वर्तमान सदर विधायक के दौरों की तुलना सबसे अधिक चर्चा में है। सबसे पहले उस भ्रम और झूठ को पूरी तरह स्पष्ट करना आवश्यक है, जो कुछ समय पूर्व पत्रकारों की दिल्ली यात्रा को लेकर फैलाया गया था। सच्चाई यह है कि श्री अयोध्या न्यास द्वारा आयोजित वह कार्यक्रम पूरी तरह से एक सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजन था उसका किसी भी राजनीति से कोई लेना-देना नहीं था। उस विशुद्ध सांस्कृतिक कार्यक्रम को किसी नेता सांसद या विधायक के नाम से जोड़ना पूरी तरह गलत निराधार और भ्रामक है। इसे जानबूझकर पूर्व सांसद से जोड़कर दिखाया गया जिससे पत्रकारों को दो भागों में बांटा जा सके। परंतु जब जमीनी स्तर पर इस पूरे मामले की सच्चाई खोजी गई और वहां गए वरिष्ठ पत्रकारों से बातचीत की गई तो सच पूरी तरह सामने आ गया। वरिष्ठ पत्रकारों का स्पष्ट बताना था कि वह कार्यक्रम न तो किसी पूर्व सांसद द्वारा कराया गया था न ही किसी को उनके माध्यम से ले जाया गया था। श्री अयोध्या न्यास द्वारा यह निमंत्रण केवल पत्रकारों को नहीं बल्कि समाज में अच्छे कार्य करने वाले सभी सामाजिक लोगों को दिया गया था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पत्रकारों को यह निमंत्रण एक पत्रकार के नाते कार्यक्रम का कवरेज करने के उद्देश्य से नहीं बल्कि व्यक्तिगत तौर पर दिया गया था। दिल्ली पहुंचने के बाद पत्रकारों ने उस सांस्कृतिक कार्यक्रम को बहुत बारीकी से देखा। जब पूज्य महाराज जी ने अयोध्या की कमियों और जमीनी सच्चाई पर अपने विचार रखे तो पत्रकारों ने बिना किसी संकोच या डर के उन तथ्यों और प्रमाणों को समाज के सामने रखा। एक सच्चे पत्रकार का यही सबसे बड़ा धर्म और कर्तव्य है कि वह किसी के भी बुलावे पर जाए पर समाज के सामने केवल सच ही प्रस्तुत करे।एक ओर जहां दिल्ली के सांस्कृतिक कार्यक्रम की सच्चाई यह रही वहीं दूसरी ओर सदर विधायक के साथ पत्रकारों का एक दल 11 सितंबर से विंध्याचल और काशी विश्वनाथ की धार्मिक यात्रा पर निकल चुका है। इस यात्रा की पृष्ठभूमि भी बहुत रोचक है। लगभग एक वर्ष पूर्व भी विधायक जी द्वारा पत्रकारों की यात्रा के लिए एक सूची बनाई गई थी लेकिन किसी कारण से उस यात्रा को रोक दिया गया था। इसके बाद जब विधायक जी स्वयं मथुरा-वृंदावन की यात्रा पर गए तब कुछ वरिष्ठ पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर व्यंग्य करते हुए पत्रकारों को यात्रा कराने से जुड़े कुछ पोस्टर और टिप्पणियां साझा की थीं। इन कटाक्षों के बाद विधायक जी ने वापस आकर एक नई योजना बनाई और अंततः 11 सितंबर की इस यात्रा की रूपरेखा तैयार करते हुए पत्रकारों को ले जाने की शुरुआत कर दी। यात्रा शुरू होते ही इंटरनेट पर बिना नाम लिए कई प्रकार की बातें लिखी जाने लगी हैं। कुछ लोग इसे एक ही झटके में दर्जनों पत्रकारों को अपने पक्ष में करने की बड़ी सफलता कह रहे हैं तो कुछ इसे 2027 के चुनाव की नैया पार करने का साधन बता रहे हैं। कई पत्रकार अपनी इच्छा से या निजी कारणों से इस यात्रा में शामिल नहीं हुए जिससे पत्रकार वर्ग में एक स्पष्ट दूरी दिखाई देने लगी है। इसके साथ ही विधायक जी द्वारा एक तरफ पत्रकारों को और दूसरी तरफ अधिवक्ताओं को अपने पक्ष में जोड़ने के प्रयास भी खुलकर सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में बार एसोसिएशन अध्यक्ष और संगठन के पदाधिकारियों की मुख्यमंत्री से भेंट कराई गई और कुछ आश्वासन दिए गए क्योंकि राम मंदिर मामले और स्थानीय समस्याओं को लेकर अधिवक्ताओं के भीतर भी काफी असंतोष देखा जा रहा था। अब इन यात्राओं और बैठकों के बीच 2027 के विधानसभा चुनाव के टिकट को लेकर भी भारी चर्चा शुरू हो चुकी है। लोगों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या 2027 में अयोध्या विधानसभा से टिकट विधायक जी के परिवार को मिलेगा किसी नए चेहरे को मिलेगा या फिर समाजवादी पार्टी को टक्कर देने के लिए पूर्व सांसद जी पुनः विधानसभा चुनाव में उतरेंगे लोग इस बात की भी याद दिला रहे हैं कि जब 2012 में वे विधानसभा चुनाव हार गए थे तो उसके बाद 2014 में लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। अब लोकसभा चुनाव के बाद क्या 2027 में उनकी फिर से विधानसभा में वापसी होगी इसे लेकर अनुमान लगाए जा रहे हैं। यद्यपि अंतिम निर्णय पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा कि चुनाव में कौन उतरेगा और कौन सा नेता कितना सफल होगा। सामने आई इन बातों ने अयोध्या की आने वाली राजनीति को अत्यंत रोचक बना दिया है।