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अपनों के आघात से आहत होती कलम: आइए एक संकल्प लें

अंतरिक्ष तिवारी की कलम से
संघर्षशील पत्रकारों की सबसे बड़ी व्यथा यह है कि जब किसी षड्यंत्र के समय अपना ही साथी प्रहार कर देता है। कुछ स्वार्थों के लिए हम अपने ही भाई को कथित पत्रकार लिखकर लांछित करने लगते हैं। हम यह क्यों भूल जाते हैं कि जब आप किसी एक व्यक्ति को ‘कथित’ लिखकर कोई खबर प्रकाशित करते हैं तो पूरा समाज संपूर्ण पत्रकार बिरादरी को उसी संदेह और अविश्वास की दृष्टि से देखने लगता हैयदि कोई साथी अपने मार्ग से भटक गया है तो उसे समझाने का प्रयास करें। वह जो भी सही या गलत करेगा उसके कर्मों का दंड उसे सुनिश्चित रूप से मिलेगा चाहे वह न्याय व्यवस्था की ओर से हो या फिर ईश्वर की ओर से। हमें आपस में लड़कर अपनी ही शक्ति और गरिमा को समाप्त नहीं करना चाहिए।आइए आज हम सब यह दृढ़ संकल्प लें कि हम किसी भी पत्रकार साथी के विरुद्ध अपनी कलम नहीं चलाएंगे। यदि हम संकट में पड़े अपने किसी भाई की सहायता नहीं कर सकते तो कम से कम उसका अहित करके पत्रकारिता के पतन का कारण भी नहीं बनेंगे।

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