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अयोध्या के निर्मोही अखाड़े में तगड़ा घमासान महंत दिनेन्द्र दास बोले दिल्ली में रची गई मेरे खिलाफ साजिश सब कुछ फर्जी है।

अंतरिक्ष तिवारी की कलम से
अयोध्या: अखिल भारतीय श्रीपंच रामानंदिय निर्मोही अखाड़ा श्री अयोध्या बैठक के महंत दिनेन्द्र दास का एक सनसनीखेज पत्र सार्वजनिक हुआ है, जिसने अखाड़े के भीतर मचे घमासान को सबके सामने ला दिया है। इस आधिकारिक पत्र के माध्यम से महंत दिनेन्द्र दास ने दिल्ली में उनके विरुद्ध हुई एक कथित कार्यवाही पर गंभीर सवालिया निशान लगाए हैं।महंत दिनेन्द्र दास के अनुसार, उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से ज्ञात हुआ कि सर्वोच्च न्यायालय में निर्मोही अखाड़ा की तरफ से एक रिट याचिका दाखिल की गई है जिसमें उन्हें महंत पद से हटाने की मांग की गई है।इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए महंत ने कहा है कि निर्मोही अखाड़ा एक पंचायती अखाड़ा है जिसके अपने निश्चित नियम हैं। उनके दावे के मुताबिक, अखाड़े में कुल 19 पंच हैं जिनमें से 13 पंच इस समय उनके साथ अयोध्या में मौजूद हैं। महंत ने आरोप लगाया है कि दिल्ली में बिना किसी पूर्व सूचना के बुलाई गई कथित बैठक और एक फर्जी रजिस्टर पर मात्र आठ लोगों के हस्ताक्षरों के आधार पर हुई यह कार्यवाही पूरी तरह से अवैध और मनगढ़ंत है।
पत्र में महंत दिनेन्द्र दास ने कार्तिक चोपड़ा नाम के व्यक्ति पर भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं। महंत के अनुसार कार्तिक चोपड़ा वर्तमान में अखाड़े के 102 वर्षीय वरिष्ठ सदस्य अतीत राजा रामचंद्राचार्य जी को दिल्ली स्थित अपने आवास पर रखे हुए हैं। महंत ने आरोप लगाया है कि अतीत जी के स्वास्थ्य और सोचने-समझने की शक्ति क्षीण होने का अनुचित लाभ उठाकर उन्हें बहला-फुसलाकर गलत बयान दिलवाए जा रहे हैं।महंत दिनेन्द्र दास ने स्पष्ट किया है कि पहले कार्तिक चोपड़ा को श्रीराम जन्मभूमि का केस देखने की जिम्मेदारी दी गई थी लेकिन कई साल पहले ही उन्हें उस काम से हटा दिया गया था। महंत के मुताबिक अब कार्तिक चोपड़ा गलत तरीके से खुद को अखाड़े का प्रतिनिधि बता रहे हैं, जबकि उन्हें ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। महंत दिनेन्द्र दास ने इस पूरी प्रक्रिया को अखाड़े की गरिमा को ठेस पहुँचाने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।

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