क्या खुद को अफसरों की फैक्ट्री समझती है उज्जवल आईएएस कोचिंग सीलिंग के सरकारी ताले को ठेंगा दिखाकर दोबारा खुला अवैध साम्राज्य अब देखना है कि विकास प्राधिकरण की कानूनी कार्रवाई इस दुस्साहस का घमंड कब तोड़ती है
अंतरिक्ष तिवारी की कलम से
अयोध्या। लखनऊ के अलीगंज में हुए दर्दनाक अग्निकांड से सबक लेते हुए जब अयोध्या विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन ने अवैध इमारतों के खिलाफ अपनी मुस्तैदी दिखाई, तो अभियान के पहले ही दिन नाका क्षेत्र की चर्चित उज्जवल आईएएस कोचिंग पर सरकारी ताला लटक गया था। प्राधिकरण की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई की जनता ने खुलकर तारीफ की थी, क्योंकि आवासीय नक्शे पर व्यापारिक खेल खेलना और बिना आग बुझाने वाले उपकरणों व अग्निशमन विभाग के एनओसी के बच्चों को बैठाना सीधे-सीधे उनकी जान से खिलवाड़ था। लेकिन असली सुर्खी और प्रशासनिक तंत्र को खुली चुनौती तो इस सीलिंग के ठीक बाद देखने को मिली।सरकारी सील लगने के बाद कायदे से नियमों को सुधारना चाहिए था, लेकिन यहाँ तो कानून की धज्जियां ही उड़ा दी गईं। सीलिंग की कार्रवाई को पूरी तरह ताक पर रखकर कोचिंग का शटर दोबारा उठा दिया गया और कक्षाएं धड़ल्ले से शुरू हो गईं। ग्राउंड जीरो के हालात देखकर तो अब ऐसा ही लगता है कि मानो यह संस्थान खुद को आईएएस-पीसीएस बनाने वाली फैक्ट्री’ समझता है, तभी तो इसे न तो देश के कानून का डर है, न आग से बचाव के नियमों की परवाह और न ही सील करने आए अधिकारियों का कोई भय। सीलिंग के सरकारी ताले का इस तरह मखौल उड़ाना उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री जी के उन कड़े आदेशों को सीधे चुनौती देना है, जो उन्होंने छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए जारी किए हैं।
इस पूरे मामले ने अयोध्या की जागरूक जनता को हैरत में डाल दिया है। एक तरफ शहर के छोटे लाइब्रेरी और कोचिंग संचालक सीलिंग के डर से प्रशासन का पूरा सहयोग कर रहे हैं और कर्ज लेकर भी सुरक्षा मानकों को पूरा करने में जुटे हैं वहीं दूसरी तरफ पहले ही दिन सील हुई यह बड़ी कोचिंग सीलिंग के बाद भी बेखौफ होकर चलाई जा रही है। जनता अब चुटकी लेते हुए पूछ रही है कि क्या इस कोचिंग के लिए सरकारी नियमों की किताब ही अलग छपी है अयोध्या विकास प्राधिकरण ने अब तक बिना किसी भेदभाव के बड़ी-बड़ी अवैध इमारतों पर कार्रवाई करके अपनी एक सख्त और निष्पक्ष छवि बनाई है। अब पूरी अयोध्या की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि विकास प्राधिकरण और अग्निशमन विभाग इस खुली अवहेलना पर क्या कड़ा एक्शन लेते हैं और दोबारा सीलिंग व प्राथमिकी एफआईआर जैसी बड़ी कानूनी कार्रवाई करके इस अवैध साम्राज्य की मनमानी कब रोकते हैं