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अयोध्या में सुगबुगाहटों का नया दौर: डॉ. अनिल मिश्रा के अतीत की सादगी और वर्तमान के वैभव के बीच उठते कुछ अनसुलझे सवाल


अंतरिक्ष तिवारी की कलम से पार्ट-1
अयोध्या की हवाओं में इन दिनों राम मंदिर के दानपात्रों से करोड़ों रुपये की कथित दान चोरी और वित्तीय गबन के आरोपों का एक नया सियासी तूफान पूरी तेजी से गर्माया हुआ है। हर चौक-चौराहों पर इस गंभीर चंदा विवाद को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है और प्रतिदिन यह मामला मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है। हालांकि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताता आ रहा है, लेकिन वर्तमान समय में उठ रहे कथित चंदा चोरी के इन गंभीर आरोपों की तपिश ने मंदिर प्रबंधन और ट्रस्ट के कद्दावर सदस्यों की भूमिका पर नए सवालिया निशान जरूर लगा दिए हैं। इसी गर्माए माहौल के बीच स्थानीय लोग चुटकी लेते हुए एक पुराना दोहा भी गुनगुनाते नजर आते हैं कि
राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट
पाछे फिर पछताओगे जब प्राण जाएंगे छूट।
इस ताजा विवाद के बीच सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या राम मंदिर ट्रस्ट जैसी पवित्र व्यवस्था के कद्दावर सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के परिवार और उनके करीबियों की किस्मत ने हाल के दिनों में कोई बहुत बड़ी छलांग लगाई है जब पत्रकारिता के स्थापित नियमों के तहत सच की तलाश में अयोध्या की लक्ष्मणपुरी कॉलोनी की तरफ रुख किया जाता है, तो वहाँ डॉ. अनिल मिश्रा का एक पुराना और बेहद साधारण सा घर दिखाई देता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक यह घर उस दौर की याद दिलाता है जब डॉ. अनिल मिश्रा ट्रस्ट के सदस्य नहीं थे और एक सामान्य होम्योपैथिक डॉक्टर के रूप में अपनी प्रैक्टिस चलाते थे। लेकिन जैसे ही समय बदला और डॉ. अनिल मिश्रा ट्रस्ट की व्यवस्थाओं से जुड़े, वैसे ही उनके रहन-सहन का भूगोल भी पूरी तरह बदल गया। आज अमानीगंज की आवास विकास कॉलोनी में बना हुआ उनका बहुमंजिला आलीशान भवन उस पुरानी सादगी से बिल्कुल अलग नजर आता है।इस नए भवन को लेकर भी अयोध्या की गलियों में कई तरह की दिलचस्प बातें हवा में तैर रही हैं। लोग बताते हैं कि दानपात्र का पैसा गायब होने या चंदा चोरी का यह ताजा विवाद सामने आने से काफी पहले जब यह आलीशान मकान बन ही रहा था तभी इसमें एक आधुनिक लिफ्ट लगाने की बात सामने आई थी। उस वक्त लोग इसे देखकर सोचने लगे थे कि आखिर इतना बड़ा बदलाव कैसे हो रहा है, और चारों तरफ यह चर्चा तेज हो गई थी कि अरे देखो मकान में लिफ्ट लग रहा है, लिफ्ट लग रहा है।’ स्थानीय स्तर पर लोग बताते हैं कि जब जनता के बीच हो रही इस जोरदार चर्चा और सुगबुगाहट की भनक डॉ. अनिल मिश्रा के कानों तक पहुँची, तो उन्होंने तुरंत सतर्कता बरती। इस शुरुआती चर्चा और विवाद को और ज्यादा आगे बढ़ने से रोकने के लिए उन्होंने आनन-आनत में उस लिफ्ट के काम को बीच में ही रुकवा दिया, ताकि लोगों का ध्यान इस तरफ न जाए।इतना ही नहीं, कुछ चर्चाएं तो यह भी दावा करती हैं कि डॉ. अनिल मिश्रा का यह नया सफर केवल अयोध्या तक ही सीमित नहीं है, बल्कि लखनऊ सहित प्रदेश के कई अन्य बड़े शहरों में भी संपत्तियों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। आम जनता के बीच इस बात की भी खूब चर्चा है कि न सिर्फ डॉ. मिश्रा बल्कि उनके कुछ बेहद करीबियों के दिन भी रातों-रात बदल चुके हैं। लोग दबी जुबान में यह कहते नजर आते हैं कि इस पूरे रसूख के बीच परिवार के लोग और बच्चे आज किस तरह बड़े शहरों में पूरी तरह सेट हो चुके हैं और एक अलग लाइफस्टाइल का आनंद ले रहे हैं, इसे अब किसी को अलग से बताने की जरूरत नहीं रह गई है।
यही वजह है कि अब अयोध्या की जनता और प्रबुद्ध वर्ग यह मांग करने लगा है कि ट्रस्ट के सभी सदस्यों के पहले के इतिहास अतीत को एक बार खंगाला जाए और आज के इतिहास वर्तमान को देखा जाए कि आखिर इस समय के भीतर कितना बड़ा अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है। लोगों के मन में यह तीखा सवाल कौंध रहा है कि क्या श्रद्धालुओं ने जिस पैसे को पूरी श्रद्धा के साथ अपने आराध्य प्रभु श्री राम की सेवा के लिए दानपात्र में डाला था उसका उपयोग अब सदस्य अपनी व्यवस्थाओं, बच्चों के भविष्य और निजी सुख-सुविधाओं को चमकाने में करेंगे जनता के बीच अब यह मांग पूरी प्रखरता से उठ रही है कि शुचिता और पारदर्शिता के लिए ट्रस्ट के हर एक सदस्य की संपत्ति और उनके वित्तीय इतिहास की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वैसे डॉ. अनिल मिश्रा के नाम के साथ चर्चाओं और आरोपों का नाता भी कोई नया नहीं है। ट्रस्ट का सदस्य बनने से पहले उन पर अयोध्या में ही एक दुकान से जुड़े विवाद के आरोप लगे थे, जिसे लेकर काफी समय तक कानूनी खींचतान भी मची हुई थी। लेकिन जैसे ही वे ट्रस्ट की मुख्यधारा में आए, सालों से लटका वह दुकान का विवाद अचानक बंद कमरों में टेबल पर आया और आपसी समझौते’ का नाम देकर हमेशा के लिए रफा-दफा कर दिया गया। लोग आज भी सवाल उठाते हैं कि यह वाकई कोई सामान्य समझौता था या फिर रसूख का भारी दबाव इसके साथ ही, अयोध्या आंदोलन में लाठियां-गोलियां खाने वाले और दशकों तक टेंट के भीतर रामलला की सेवा करने वाले कई सच्चे संत और आंदोलन के पुराने चेहरे आज खुद को हाशिए पर महसूस कर रहे हैं। उन्हें इस नई व्यवस्था में कोई जगह नहीं मिली। यही वजह है कि आज श्रद्धालु यह तीखा सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर पुराने दिग्गजों को दरकिनार कर इस व्यवस्था में डॉ. अनिल मिश्रा को इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों मिली विपक्ष ने भी समय-समय पर डॉ. अनिल मिश्रा को लेकर तीखे सवाल दागे हैं। चाहे वह साल 2021 का बहुचर्चित जमीन सौदा रहा हो, जहां मात्र कुछ ही मिनटों के भीतर 2 करोड़ की जमीन को सीधे 18.5 करोड़ रुपये में खरीदा गया था और उस पूरे दस्तावेज में डॉ. अनिल मिश्रा मुख्य गवाह के तौर पर शामिल थे। हालांकि इन सभी मामलों में ट्रस्ट का रुख हमेशा रक्षात्मक रहा है और आरोपों को नकारा जाता रहा है लेकिन जिस तरह से कुछ खास करीबियों की रातों-रात तरक्की हुई है, उसने लोगों के मन में उत्सुकता और शक दोनों को बढ़ा दिया है। ऊपर से नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति इस पर खुलकर स्थिति स्पष्ट करने या मीडिया के सीधे सवालों का सामना करने को तैयार नहीं दिख रहा है।
रही-सही कसर हाल ही में सामने आए चंपत राय जी के एक वीडियो ने भी पूरी कर दी, जिसमें उनके गोल-मटोल बयानों ने इस विवाद को और हवा दे दी है। इस टालमटोल वाले रवैये को देखकर अयोध्या के संतों के एक धड़े में नाराजगी देखी जा रही है। कुछ संतों का सीधा आरोप है कि जब जांच करने वाले भी वही लोग हैं और सवाल भी उन्हीं पर हैं तो भला ऐसी व्यवस्था में न्याय की उम्मीद किससे की जाए ऐसे में अब संतों और आम जनता का भी यही मानना है कि सत्य क्या है और असत्य क्या, इसका अंतिम न्याय अब साक्षात् प्रभु श्री राम ही करेंगे।रही बात एक सच्चे पत्रकार के रूप में मेरी तो रसूखदारों के इस चक्रव्यूह के बीच आने वाले समय में मेरे साथ क्या होगा, मुझे इसका बिल्कुल भी अंदाजा नहीं है, लेकिन एक निष्पक्ष रिपोर्टर के तौर पर मेरी साख और संकल्प अडिग है। परिस्थितियां चाहे जो भी हों आपकी ताकत’ की यह कलम कभी दबाव में नहीं आएगी और प्रभु के नाम पर हो रही हर सुगबुगाहट का सच पूरी ईमानदारी से लिखती रहेगी। अमानीगंज के इस नए आलीशान भवन और लक्ष्मणपुरी कॉलोनी के उस पुराने साधारण घर के बीच के इस बड़े अंतर को देखकर जनता के मन में उठने वाले ये सवाल इतनी आसानी से शांत होने वाले नहीं हैं।इस विशेष खोजी सिरीज़ के अगले भाग पार्ट-2 में देखिए राम मंदिर ट्रस्ट के एक और व्यक्ति की की पूरी कहानी जो पहले क्या थे और आज क्या से क्या बन चुके हैं पूरे प्रमाण पक्के दस्तावेजों और खोजी सूत्रों के सबूतों के साथ बने रहिए हमारे साथ

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