अंतरिक्ष तिवारी की कलम से =====================
अयोध्या। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत प्रदेश भर में अवैध कब्जों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई चल रही है, लेकिन रामनगरी अयोध्या में नजूल विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर के सिविल लाइन और पुष्पराज चौराहा के पास हाल ही में हुई कार्रवाई के बाद अब यह सवाल बड़ा हो गया है कि प्रशासन की हिम्मत सिर्फ गरीब के घर तक ही क्यों सीमित है जिस सिविल लाइन क्षेत्र में जमीन खाली कराई गई उसके ठीक बगल में नजूल की बेशकीमती जमीनों पर बड़े-बड़े होटल, बैंक नामी एजेंसियां और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स धड़ल्ले से चल रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इन जमीनों को लेकर बहुत बड़ा खेल हुआ है। नजूल और निजी जमीन के फर्क को खत्म कर व्यावसायिक लाभ लिया जा रहा है और नजूल विभाग फाइलों पर लीपा-पोती करके अपनी पीठ थपथपा रहा है।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब से सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राम मंदिर का ऐतिहासिक फैसला आया है, तब से भू-माफियाओं की नजर सरकारी और नजूल की जमीनों पर बड़ी तेजी से गड़ गई है। फैसले के बाद जैसे ही विकास की लहर चलीभू-माफियाओं ने सोची-समझी रणनीति के तहत सरकारी जमीनों पर कब्जा करना शुरू कर दिया। इसका ताजा उदाहरण बेनीगंज का वह क्षेत्र है जहां नजूल की एक बड़ी जमीन पर कब्जा किया गया है। स्थानीय लोगों ने एक वर्ष पूर्व शिकायत दर्ज कराई, खबर भी प्रमुखता से चली, लेकिन आज तक कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति हुई। प्रशासन की रणनीति साफ है जब तक वहां बड़े निर्माण पूर्ण नहीं हो जाते तब तक इसे लटकाए रखो और निर्माण पूरा होते ही शिकायतकर्ता को कह दो कि अब मामला कोर्ट में है।अयोध्या में नजूल की जमीनें अब भू माफियाओं की जागीर बन गई हैं। चाहे उदया पब्लिक स्कूल के पीछे का इलाका हो, तुलसी उद्यान के पीछे की बेशकीमती भूमि, थाना राम जन्मभूमि के ठीक पीछे का क्षेत्र, पंचकोशी मार्ग या फिर 14 कोसी परिक्रमा मार्ग से सटी माझा की जमीनें—हर जगह भू-माफियाओं ने सरकारी जमीन को अपना समझकर कब्ज़ा कर लिया है। इन जगहों पर नजूल विभाग की जमीन पर बिना किसी वैध एनओसी और बिना पास नक्शे के बड़े-बड़े होटल, रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल और होम स्टे खड़े हो गए हैं। सवाल यह है कि नजूल विभाग अपनी ही जमीनों को क्यों नहीं बचा पा रहा क्या अयोध्या में नजूल विभाग के अधिकारी मुख्यमंत्री जी से भी बड़े हो गए हैं या फिर भू माफियाओं के आगे नतमस्तक हैं प्रशासन की दोहरी नीति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज एक आम नागरिक के लिए मकान का नक्शा पास कराना टेढ़ी खीर है। विकास प्राधिकरण से नक्शा पास कराने के लिए नजूल की एनओसी, नगर निगम की एनओसी और न जाने कितनी तरह की अनुमतियां जमा करनी पड़ती हैं। इतनी कठिन नियमावली के बावजूद पूरी रामपथ रोड को देख लीजिए वहां लमसम जमीन नजूल विभाग की है, लेकिन वहां धड़ल्ले से व्यावसायिक निर्माण हो चुके हैं। नजूल विभाग का सिस्टम किसी बड़े षड्यंत्र जैसा है। ए सी कमरों में यह पहले ही तय कर लिया जाता है कि किस फाइल को ठंडे बस्ते में डालना है और किसे कोर्ट के चक्कर में फंसाकर हमेशा के लिए शांत कर देना है।दिल्ली में होटल हादसे जैसी दर्दनाक घटना से हमें सबक लेने की जरूरत है। अयोध्या में भी तमाम होटल बिना मानक के चल रहे हैं। यदि यहाँ कोई घटना होती है, तो उसका पूर्णतः जिम्मेदार कौन होगा क्या प्रशासन उस वक्त अपनी जिम्मेदारी से बच पाएगा पूरे अयोध्या धाम की छवि आज पूरे विश्व में बनी हुई है, लेकिन कुछ लोग अपने चंद स्वार्थ के लिए इसे मिट्टी में मिलाने पर तुले हैं। इन्हें अब मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम से भी डर नहीं लगता।मर्यादा पुरुषोत्तम की इस नगरिया में मर्यादित कार्य ही होने चाहिए। लोकतंत्र, संविधान और नियमावली सबके लिए बराबर है। मुख्यमंत्री जी के जीरो टॉलरेंस का संकल्प सर्वोपरि है और प्रशासन को उसी के अनुरूप काम करना होगा। मुख्यमंत्री जी से निवेदन है कि 2017 से 2026 तक के कार्यकाल की निष्पक्ष जांच हो। जिस अधिकारी के समय में ये अवैध निर्माण हुए उन पर वही बुलडोजर नीति लागू हो जो गरीब के लिए अपनाई जा रही है। ट्रांसफर-पोस्टिंग के भरोसे बचने का दौर अब खत्म हो चुका है। प्रशासन को यह जवाब देना ही होगा कि वीआईपी लोगों के लिए नियम अलग और आम आदमी के लिए अलग क्यों हैं जनता और जागरूक कलम कार अब इस मामले में आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैं। प्रशासन के ए सी कमरों में रची जाने वाली यह साजिश अब और नहीं चलेगी।