ब्रेकिंग न्यूज़

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की यात्रा पर सपा के स्वागत से सनातनी नाराज: क्या अखिलेश यादव गौमाता को राज्यमाता घोषित करने और मथुरा में कृष्ण मंदिर निर्माण का लिखित संकल्प लेंगे या महाराज जी सिर्फ चुनावी मोहरा बनकर रह जाएंगे

==अंतरिक्ष तिवारी की कलम से
अयोध्या ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज की 81 दिवसीय गविष्ठि यात्रा आज रामनगरी अयोध्या में है जिसका मुख्य उद्देश्य देश में गौ-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना और गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराना है। लेकिन उत्तर प्रदेश में 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों को नजदीक देखते हुए इस धार्मिक आंदोलन पर अब गहरी सियासी बिसात बिछने लगी है। हर जिले में समाजवादी पार्टी के नेताओं और खुद पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा जिस तरह आगे बढ़कर शंकराचार्य जी का भव्य स्वागत किया जा रहा है उसने सनातनी समाज के भीतर कई गंभीर सवालों को जन्म दे दिया है। जागरूक सनातनी अब सीधे सवाल पूछ रहे हैं कि क्या सपा प्रमुख अपने आगामी चुनावी घोषणा पत्र में लिखित रूप से यह ऐलान करेंगे कि उनकी सरकार आने पर वे तुरंत गौमाता को उत्तर प्रदेश में राज्यमाता का दर्जा देंगे पूरे प्रदेश में गौ-हत्या प्रतिबंध कानून कड़ाई से लागू करेंगे और मथुरा में भव्य श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के निर्माण में अपना पूर्ण सहयोग देंगे।आज सनातन प्रेमी जनता और संत समाज महाराज जी को इतिहास का वो काला पन्ना भी याद दिला रहा है जब साल 2015 में उत्तर प्रदेश की तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान खुद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज पर बनारस में पुलिस द्वारा बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया गया था। सितंबर 2015 में गंगा में प्रतिमा विसर्जन की मांग को लेकर अड़े महाराज जी और अन्य संतों पर तत्कालीन सपा सरकार के इशारे पर पुलिस ने जमकर लाठियां बरसाई थीं जिसमें महाराज जी स्वयं लहूलुहान हो गए थे। यही वजह है कि आम भक्तों और धार्मिक चिंतकों का स्पष्ट मानना है कि यदि अखिलेश यादव और उनकी पार्टी इन मुख्य सनातन मांगों पर लिखित संकल्प लेने से कतराती है, तो यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि यह सारा मान-सम्मान केवल 2027 के चुनाव में सनातनी वोट बैंक को साधने का एक सियासी पैंतरा है। सनातन प्रेमी जनता लगातार महाराज जी को आगाह कर रही है कि यदि वे इस राजनीतिक चक्रव्यूह से समय रहते सावधान नहीं हुए तो उनका यह अत्यंत पावन गौ-आंदोलन बिना किसी ठोस नतीजे के सिर्फ एक राजनीतिक मोहरे की तरह इस्तेमाल होकर अधूरा रह जाएगा।

Related Articles

Check Also
Close
Back to top button