राम मंदिर की 200 चांदी की ईंटें तो मिल गईं पर सवाल बड़ा है दान के समय भव्य स्वागत करने वाला अयोध्या का सिंधी समाज आखिर राजू मनवानी के वीडियो पर इतने दिनों तक क्यों चुप बैठा रहा अब अचानक प्रेस कॉन्फ्रेंस के पीछे डर है दबाव है या कोई बड़ा सियासी खेल
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अंतरिक्ष तिवारी की कलम से अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की पावन नगरी अयोध्या में इस समय आस्था और राजनीति को लेकर एक ऐसा नया विवाद छिड़ गया है जिसने हर आम आदमी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सिंधी समाज द्वारा दी गईं 200 चांदी की ईंटों का सच अब सबके सामने आ चुका है। ट्रस्ट की तरफ से पूरा हिसाब-किताब मिलने के बाद दान देने वाले राजू मनवानी ने खुद चिट्ठी लिखकर संतोष जताया है और साफ किया है कि उनकी ईंटें पूरी तरह सुरक्षित हैं जिन्हें पिघलाकर स्टेट बैंक के लॉकर में रखवाया गया है। लेकिन जब ईंटों का मामला सुलझ चुका है तो अयोध्या की जनता और मीडिया के मन में एक नया और बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जनता अब पूछ रही है कि जब राजू मनवानी का वीडियो सोशल मीडिया पर आया था और ईंटों के गायब होने की चर्चा चल रही थी तब से लेकर आज तक अयोध्या का सिंधी समाज चुप क्यों बैठा था अगर राजू मनवानी का वह बयान इतना ही गलत था और उससे समाज की भावनाएं आहत हो रही थीं तो स्थानीय लोगों ने तुरंत उसी दिन इसका विरोध क्यों नहीं किया इतने दिनों तक आखिर किस बात का इंतजार किया जा रहा था और किसके कहने पर यह चुप्पी साधी गई थी प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्थानीय समाज के लोगों ने कहा कि दान हमेशा गुप्त होता है और उसका हिसाब मांगना महापाप है।लेकिन अब जनता यह सवाल उठा रही है कि राम मंदिर के लिए जो चांदी की ईंटें पूरे देश-विदेश के सिंधी समाज से चंदा जोड़कर दी गई थीं वे तो मंदिर में इस्तेमाल होने के लिए दी गई थीं। ऐसे में इसे गुप्त दान माना जाए या मंदिर निर्माण में सहयोग अगर राजू मनवानी ने दान देने वालों की तसल्ली के लिए सिर्फ इतना पूछ लिया कि जो ईंटें हमारे समाज ने दी थींउनका क्या हुआ और ब्योरा क्या है तो इसमें पाप कहां से हो गया क्या अपने ही दिए गए सहयोग की जानकारी मांगना कोई गुनाह है बड़ी बात यह है कि जब देश-विदेश के सिंधी समाज के लोग अयोध्या में इन चांदी की ईंटों को दान करने के लिए आए थे तब इसी स्थानीय सिंधी समाज के लोगों ने पलक-पावड़े बिछाकर उनका भव्य और जोरदार स्वागत किया था। उस समय तो वे समाज के गौरव थे और उनके इस कदम की खूब तारीफ की जा रही थी। लेकिन जैसे ही आपके ही समाज के व्यक्ति यानी राजू मनवानी ने ईंटों को लेकर सवाल उठाया उन्हें विपक्षी पार्टियों का मोहरा कहा जाने लगा क्या अयोध्या के सिंधी समाज के पास इस बात का कोई पक्का सबूत या कोई कॉल रिकॉर्ड है जो यह साबित कर सके कि वह विपक्ष के इशारे पर काम कर रहे थे या फिर सिर्फ अपना बचाव करने के लिए उन्हें दोषी ठहराया जा रहा था इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्थानीय सिंधी समाज जिस तरह बार-बार घूम-फिरकर सिर्फ विपक्ष-विपक्ष की रट लगा रहा था उससे उनके बयानों से ही असली जवाब साफ तौर पर सामने आ रहे थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस की भाषा और अंदाज को देखकर अयोध्या की जनता अब साफ-साफ यह समझने लगी है कि यह बातें किसी राम भक्त या राम मंदिर की आस्था के नाते नहीं की जा रही थीं, बल्कि यह पूरी तरह से सत्ता पक्ष की तरफ से की जा रही बैटिंग थी। जनता खुलकर कह रही है कि इसका सीधा सा अर्थ यही है कि आप केवल सत्ता पक्ष की तरफ से बोल रहे हैं। राम मंदिर परिसर में चढ़ावे की चोरी और हेराफेरी का जो इतना बड़ा कांड हुआ है धन और आभूषण चोरी का मामला सामने आया है और चीजें बरामद भी हुई हैं जिसकी जांच खुद विशेष जांच दल कर रहा है उस गंभीर मामले पर बोलने के बजाय स्थानीय सिंधी समाज सिर्फ विपक्ष पर ठीकरा फोड़ रहा है। ऐसे में जनता अब तीखा सवाल पूछ रही है कि जब सच में इतना बड़ा घोटाला हुआ है और जांच जारी है तब आप लोग यह प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आखिर कौन सी भूमिका निभाना चाहते हैं क्या आप राम मंदिर के भक्तों के साथ खड़े हैं या सत्ता के गलियारों में बैठे अपने आकाओं को खुश करना चाहते हैंअगर राजू मनवानी ने वाकई कोई गलत काम किया था तो अयोध्या का सिंधी समाज उसी समय सामने क्यों नहीं आया और उनका सामाजिक बहिष्कार क्यों नहीं किया क्या आगे समाज उनके खिलाफ कोई कदम उठाने की हिम्मत दिखाएगा अयोध्या के बाजारों में अब यह चर्चा तेज है कि सिंधी समाज ज्यादातर व्यापारियों का समाज है। क्या इन व्यापारियों के ऊपर किसी सरकारी जांच टैक्स या धंधे के नुकसान का कोई बड़ा प्रशासनिक दबाव था क्या इसी डर की वजह से इतने दिनों तक मौन रहने के बाद अचानक यह प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई या फिर इस समाज के कुछ खास लोगों को किसी राजनीतिक पार्टी का बड़ा सहारा मिला हुआ है अयोध्या के लोग अब इस बात पर भी तंज कस रहे हैं कि आज की गंदी राजनीति हमारे समाज को किस तरफ ले जा रही है। लोग कह रहे हैं कि अगर घर में किसी एक राजनीतिक दल या विचारधारा का असर आ जाए तो पति-पत्नी और बच्चे भी आपस में बंट जाते हैं। आज हम धर्म जातियों और मजहब में इस कदर बंटते जा रहे हैं कि मर्यादा की नगरी में भी हर बात पर राजनीति शुरू हो जाती है। क्या हमारी संस्कृति हमारे संस्कार और हमारी सच्चाई सब कुछ सिर्फ टीआरपी और राजनीतिक फायदे के लिए खत्म होती जा रही है इस पूरे मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले कुछ चेहरों के संबंध सीधे तौर पर सत्ताधारी पार्टी के बड़े नेताओं से जुड़े बताए जा रहे हैं। समझदार लोगों का कहना है कि जब ट्रस्ट के जवाब से पूरा मामला पहले ही शांत हो चुका था तब अचानक इस प्रेस की रणनीति कब और किसके कहने पर की गई इसका असली मकसद क्या था अगर इन लोगों की पूरी कॉल डिटेल्स यानी फोन पर बातचीत का रिकॉर्ड निकालकर सार्वजनिक कर दिया जाए तो पूरा सच पानी की तरह साफ हो जाएगा। लेकिन चूंकि इस पूरे विवाद से किसी न किसी राजनीतिक दल को फायदा पहुंचना है इसलिए ऐसी किसी निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना बेकार है। चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष कोई बड़ा व्यापारी हो या कोई आम नागरिक भगवान के नाम पर इस तरह की राजनीति करने और सच को दबाने की कोशिशों को दुनिया की अदालत भले ही छोड़ दे लेकिन ऊपर बैठे भगवान चित्रगुप्त ने सबका बहीखाता और कर्म नोट कर लिए हैं। प्रभु श्री राम की नगरी में जो भी राजनीति या गलत काम करेगा उसे ईश्वर के दरबार में उसकी सजा मिलकर ही रहेगी।