अयोध्या में भू-माफियाओं की मनमानी: बिना लेआउट जमीन बेचकर जनता को लगा रहे चूना बुलडोजर कार्रवाई भी पड़ रही फीकी
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==================================अंतरिक्ष तिवारी की कलम से===================
अयोध्या इन दिनों विकास की नई ऊंचाइयों को छू रही है लेकिन इसी की आड़ में भू-माफियाओं का एक खतरनाक खेल भी चल रहा है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि एक तरफ विकास प्राधिकरण बिना लेआउट के जमीन बेचने पर रोक लगाने की बात कहता है, तो वहीं दूसरी तरफ रजिस्ट्री विभाग खरीदार और विक्रेता की आपसी सहमति के आधार पर उन जमीनों की धड़ल्ले से रजिस्ट्री कर देता है जिनका लेआउट पास ही नहीं है। यह स्थिति विकास प्राधिकरण के राजस्व के लिए तो बड़ी चपत है ही, साथ ही सरकार के लिए भी एक गंभीर चिंता का विषय है। उत्तर प्रदेश सरकार को इस पर गहन चिंतन करते हुए अपनी नियमावली में कड़ा बदलाव करना चाहिए, ताकि विकास प्राधिकरण और रजिस्ट्री विभाग एक साथ मिलकर काम करें और बिना लेआउट वाली जमीनों के बैनामे पर प्रभावी रोक लग सके।
खासकर अयोध्या विधानसभा क्षेत्र में जो विकास प्राधिकरण के दायरे में आता है वहां बिना लेआउट पास कराए जमीनों की खरीद-फरोख्त का धंधा बेखौफ जारी है। एक तरफ मुख्यमंत्री ‘जीरो टॉलरेंस की बात करते हैं तो दूसरी तरफ भू-माफिया नियमों को ताक पर रखकर अपना खजाना भर रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि जब प्राधिकरण का बुलडोजर इन प्लॉटों पर चलता है, तो भू-माफिया मजाक उड़ाते हुए कहते हैं कि साहब तो प्लॉट बराबर कर गए अब काम फिर शुरू होगा। प्रशासन कार्रवाई करता है और फाइल बंद हो जाती है, लेकिन अगले ही दिन वहां फिर से अवैध बिक्री शुरू हो जाती है। ऐसे में सरकारी कार्रवाई महज एक औपचारिकता बनकर रह गई है। जब तक सरकार नियमावली बदलकर रजिस्ट्री विभाग की जवाबदेही तय नहीं करेगी और विकास प्राधिकरण के राजस्व की रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाएगी, तब तक भू माफियाओं के हौसले कम नहीं होंगे और सिर्फ आम जनता का नुकसान होता रहेगा।